जैसा कि हम सभी अच्छे से वाकिफ है कि भारतवर्ष की पूर्व एक्सटर्नल अफेयर मिनिस्टर श्री मति सुषमा स्वराज जी ने ६७ वर्ष की आयु में ६ अगस्त, २०१९ को स्वर्ग प्राप्ति की है। इनका जन्म १४ फरवरी, १९५२ में हरयाणा राज्य के अम्बाला छावनी में हुआ था। इनके परिवार में पिता हरदेव शर्मा, माता श्री मति लष्मी देवी, भाई गुलशन शर्मा, और बहन वंदना शर्मा थे। इन्होने अपनी उच्च शिक्षा में लॉ की डिग्री पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से प्राप्त की। १९७३ में इन्होने भारतीय सुप्रीम कोर्ट में अपने वकालत की प्रैक्टिकल शिक्षा प्राप्त करने की शुरुआत करी।

१३ जुलाई १९७५ में इनका विवाह स्वराज कौशल के साथ हुआ जो की सुप्रीम कोर्ट में ही इनके साथी वकील थे। उसके बाद इस दम्पति को एक बेटी के रूप में आशीर्वाद मिला जिनका नाम बांसुरी स्वराज है। जो कि पेशे से अपने माता व पिता की तरह एक वकील हैं। २०१६ में कुछ शारीरिक दिक्कतों की वजह से श्री मति सुषमा स्वराज का किडनी ट्रांसप्लांट का ऑपरेशन हुआ। और बहूत दुखद ९ अगस्त, २०१९ में इन्होने स्वर्ग प्राप्ति की। बेशक इनका निधन भारतीय जनता पार्टी व पूरे देश के लिए एक बहुत ही बड़ा नुक्सान है।

राजनीतिक उपलब्धियां

श्री मति सुषमा स्वराज जी ने भारतीय पॉलिटिक्स के अपने अब तक के करियर में कई प्राथमिकताओं में भागीदारी की है। इन्होने शुरूआती दौर से ही भारतीय जनता पार्टी का दामन थामे रखा।  १९७७ में इनको हरयाणा के विधान सभा में कैबिनेट मंत्री के रूप में चुना गया। उस समय इन्होने सबसे कम उम्र में कैबिनेट मंत्री बनने का औधा प्राप्त किया।१९९० में इनकी काबिलियत को देखते हुए इन्हे राज्य सभा के लिए चुना गया।  इसके बाद इनके जीवन में आने वाला अचीवमेंट था १९९६ में लोक सभा का मेंबर बनना। १९९८ में ये दिल्ली की पहली मुख्य मंत्री बनी।

भारतीय जनता पार्टी की जानेमानी राजनेता सुषमा सवराज

 

इनका पॉलिटिक्स का सफर युहीं कई अचीवमेंट्स से भरा रहा। २००३ में इन्होने हेल्थ फैमिली वेलफेयर एंड पार्लियामेंट अफेयर्स मंत्री के रूप में सपथ ग्रहण की। २०१४ में जब इन्हे एक्सटर्नल अफेयर मंत्री बनाया गया, तब उस समय के दौरान श्री मति सुषमा स्वराज जी ने दुनिया क सामने पक्ष बड़े ही उच्च ढंग से रखा और अपने रोल को बखूभी निभाया। तो ये तो था इनका राजनीति का सफर जिसमे इन्होने बहुत ही जल्द और बहुत ही कम समय में सफलता पा ली और भारतीय जनता पार्टी एक दिग्गज नेता के रूप में उभरी।

कुछ अंतिम शब्द

वह विदेश मंत्रालय के लिए एक मानवीय स्पर्श ला पायीं और यह स्पर्श बहुत सुलभ था। उन्होंने दुनिया भर के कई भारतीयों के बचाव में प्रभावी भूमिका निभाई। वह एक प्रभावी लेखिका थीं और हिंदी और अंग्रेजी दोनों पर उनकी समान कमान थी। उनके असामयिक निधन में, राष्ट्र ने एक सक्षम प्रशासक, एक प्रभावी सांसद और लोगों की सच्ची आवाज खो दी है। विभिन्न कारणों से विदेशों में फंसे भारतीयों की शिकायतों के समाधान के लिए सोशल मीडिया के उनके अभिनव उपयोग के लिए उनकी प्रशंसा की गई। अधिकारियों के साथ व्यक्तिगत तालमेल के कारण सुषमा स्वराज मंत्रालय में बहुत लोकप्रिय हो गयी थीं। उनके कार्यकाल में उनके साथ काम करने वाले भारतीय राजदूतों ने सुषमा जी को श्रद्धांजलि दी।

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